मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

भाषा संचेतना

 चल भी न सकें साथ लेकर बौद्धिक वफादारी

कैसे सींचते हैं आप सुरभित जिंदगी की क्यारी

एक पहल ही तो है सर्जना जगत के सब कार्य

अभिव्यक्ति सत्य है तो भाषा में ना हो दुश्वारी


हिंदी की प्रस्तुतियों में अंग्रेजी में प्रतिक्रियाएं

अंग्रेजी मोह नहीं तो क्या है हिंदी मोह खुमारी

बौद्धिकता के दो चेहरे भाषा में जो अस्पष्टता

हिंदी क्षरण पर चुप रहना गूंगों की तरफदारी


हिंदी के पोस्ट पर अंग्रेजी में थैंक यू लिखना

हिंदी का अपमान इस जीवंतता की है शुमारी

चावल में कंकड़ सा लगता है इतर भाषा शब्द

भाषा की शुद्धता भी शिक्षितों की जिम्मेदारी


विद्वान वह है असफल जिनमें भाषा मिश्रित

आश्रित होने पर लुट जाती है जमींदारी

मुझसे जुडना है तो भाषा संचेतना है प्रथम

वरना अकेले ठीक हूँ करते हिंदी की तरफदारी।


धीरेन्द्र सिंह

25.02.2026

05.20

रूठना

रूठने की क्या अदा है समझ नहीं आए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


शब्दों पर हुई चर्चा भाव का हुआ खर्चा

उन्होंने लिख दिया लिखा मैंने भी पर्चा

हिंदी का सिपाही हूँ अंग्रेजी शब्द क्यों आए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


लाइक मेरी रचना को करें तो हैं दिखती

टिप्पणी प्रतिक्रिया ना उनकी तेज थपकी

कहती हैं व्यक्ति विशेष पर लिखा क्यों जाए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


बोलीं कि सबको लिखती अंग्रेजी में लिखा

हिंदी के साधक को अंग्रेजी में लिखा दिखा

मेरे द्वारा अब अंग्रेजी में भाषा शास्त्र कहा जाए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


वह श्रेष्ठ हैं विदुषी हैं करता हूँ उनका सम्मान

चिंतन की प्रक्रिया में स्तब्ध हुआ जो आसमान

आप यह ना पूछें कौन आदि शक्ति है बताएं

दिखती है पर लिखती नहीं, लिखते जाएं।


धीरेन्द्र सिंह

24.02.2026

20.08

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

निपुण चितेरा

चेतना हुई चपल चहक उठा है सवेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा


चित्त बसा चित्र है अभिनव ना विचित्र

भावनाओं की कलियां कल्पना की मित्र

आपका उदय जीवन निर्मल वलय घेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा


शयनपूर्व मेरी रचनाओं पर दे प्रतिक्रियाएं

भोर चहचहाते शब्द कलरव नित जगाएं

आपका सानिध्य सर्जन सूर्य उदय मुंडेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा


प्रदत्त आपका यह अलंकार "निपुण चितेरा"

महत्व मेरे लेखन का आपने जो यूँ उकेरा

तन अपरिचित मन हर्षित चर्चाओं का डेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा।


धीरेन्द्र सिंह

24.02.2026

05.43

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

साउथ अफ्रीका

 क्या खेल है क्रिकेट

जैसे जंगल का आखेट

लग गया तो लग गया

वरना होता निशाना ठेठ


खूब हंगामा हुआ सब ओर

भारत पर चले ना कोई जोर

सब दे गए अपना विकेट भेंट

कारणों को दें अब तर्क लपेट


साउथ अफ्रीका की टीम

है क्रिकेट की हकीम

चमके गेंद-बल्ले समेत

हल चला जैसे खेत


ऊर्जा, रुपया, समय कर व्यर्थ

इतनी करारी हार का क्या अर्थ

सुपर आठ भारतीय टीम लपेट

साउथ अफ्रीका टीम ने दिया फेंट।


धीरेन्द्र सिंह

23.02.2026

08.09

कोशिश

रात्रि के 11 बज रहे हैं

साउथ अफ्रीका से

हार चुका भारत

टी 20 मैच,


इस पराजय में

याद आयी तुम

जो

करती है संघर्ष खुलकर

और

बदल देती है निर्णय,


यह बताओ

तुम भारतीय क्रिकेट में

क्यों नहीं,

क्या जीत वहीं, जहां

बोले बल्ला 

अभिषेक शर्मा का प्रयास,


मुग्धित है क्रिकेट अभिषेक पर

जैसे

उन्मुक्त प्रशंसक हूँ तुम्हारा

जानती हो

समर्पित कोशिश ने ही

हार को

जीत में है संवारा;


सुनो

तुम जिस अंदाज में

आ जाती हो

जेहन में मेरे, संभावनाएं घेरे

चली जाओ न

लिए अपनी यही ऊर्जा

भारतीय क्रिकेट टीम में,


तुम अजेय हो

इसीलिए बिना तुम्हें बोले

तुम्हारी कामना करता हूँ,

अविजित असाधारण रहो

यही कोशिश

यही कामना करता हूँ।


धीरेन्द्र सिंह

22.01.2026

23.01

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

खिलना

 कोई कैसे खिलता है

कलियों से पूछा तो

बागीचा हंस पड़ा,

पुष्प ने कहा

जिसकी दृष्टि में

जो जंच पड़ा,

उलझन में

काफी देर तक

बागीचे में रहा खड़ा,


खिलना क्या

दृष्टि का विषय है

या कि यह कहीं

संतुष्टि का विषय है,

तर्क उलझाए रहा अड़ा,

बागीचा बोल पड़ा

मात्र किताबी ज्ञान

क्या जाने अनुभव घड़ा,


व्यक्ति रहता है खड़ा

बागीचा में

खिलने का उपाय ढूंढते,

कलियां रहती हैं

मंद-मंद मुस्कराती,

पुष्प रहते हैं बिखेरते

सुगंध, रंग अनेक,

व्यक्ति करते रहता है

खिलने का प्रयास।


धीरेन्द्र सिंह

22.02.2026

06.19

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

भाषा कोंपल उगती नई नई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


21 फरवरी का यह दिन निर्धारण

बहु मातृभाषा आधारित उच्चारण

भाषा भी विपणन की प्रत्याशा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


मातृभूमि से सन्नद्ध रहती मातृभाषा

हिंदी संग सम्बद्ध हैं भारतीय भाषा

वसुधैव कुटुम्बकम लिए आशा नई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


राजभाषा कार्यालयों में रही कराह

राष्ट्रभाषा हिन्दी बोलनेवालों की चाह

मातृभूमि में हिंदी को कई निराशा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


बांग्लादेश की पहल यूनेस्को का स्वीकार

रजत जयंती दिवस बीता ना सुनी हुंकार

बहुभाषा प्रयोग यूनेस्को की अभिलाषा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई।


धीरेन्द्र सिंह

21.02.2026

09.52