भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
इतना रीता भी नहीं कि
ढूंढू व्यक्ति करने को बात
इतना भरा भी नहीं कि
कर सकूं अनदेखा जज्बात
मन की कूंची है तत्पर
बहुरंगी भावनाओं की सौगात
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