जी रहे हैं खुल जीवन जुगत भरी चतुराई में
और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में
अपने दिल की धड़कन की चिंता सबको है
अपने खिल हो जाएं पुलकित निजता वो है
क्या-क्या रहे छुपाते जीवन की तुरपाई में
और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में
यादें रंग-बिरंगी फीके प्रभाव में करें आलोड़न
पीड़ाएं दुबकाए कोने हृदय करे प्रायः प्रभु भंजन
जीवन कितना दिया -लिया पारस्परिक बहुराई में
और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में
क्या समझे कितना समझे जब चिंतन हो उथले
जिसको जितना समझा जीवन वैसे थापे उपले
जीवन जोड़-घटाना कर भरी अकुलाहट रंगराई में
और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में।
धीरेन्द्र सिंह
13.01.2026
14.45



