शनिवार, 7 मार्च 2026

नारी

शिव और शक्ति

नारी है भक्ति


सुदृढ, सक्षम, सुकोमल

संरचना की शतदल

युगनिर्माण साक्षी

नारी ही भक्ति


सनातन का आधार

नारी शक्ति प्रकार

आरोहण आसक्ति

नारी ही भक्ति


सांस-सांस नारी रूप

आस-साथ नारी धूप

नारी वैभव, मुक्ति

नारी ही भक्ति


अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष

ध्यानाकर्षण हो सहर्ष

नारी नहीं युक्ति

नारी ही भक्ति 🙏


धीरेन्द्र सिंह

11.18

08.03.2026

लाइक

 रचनाओं को

निरंतर लाइक करना

सम्मान है

रचना और रचनाकार का,

रचनाकार का दायित्व है

लाइक करनेवाले को देना

धन्यवाद

पर कैसे?

लाइक कर्ता के

इनबॉक्स में जाकर

धन्यवाद ज्ञापन

आभार है,

यह प्रणाली

लाइक को नमस्कार है।


धीरेन्द्र सिंह

10.57

08.03.2026

तलहटी

तलहटी से उभरते झोंके उठे हैं

यादें सोई थीं कुछ छूटे उठे हैं


टिमटिमाती आंखों के प्रकाश पुंज

अवलोकन पर दृश्य सब है धुंध

भावनाओं के पथ जगे अनूठे हैं

यादें सोई थीं कुछ छूटे उठे हैं


अब न कसमसाहट ना बेचैनी

निरख मिले राहत हथौड़ी छैनी

शिल्पकार असफल पड़े टूटे हैं

यादें सोई थीं कुछ छूटे उठे हैं


तलहटी व्यक्तिगत आंतरिक श्रृंगार

यहीं से रुनझुन यही से उठे हुंकार

अपनी पगुराहट संग टूटे खूंटे है

यादें सोई थी कुछ छूटे उठे हैं।


धीरेन्द्र सिंह

14.11

07.03.2026

शुक्रवार, 6 मार्च 2026

तलाश

खुद को तलाशिए बिखरे हुए हैं सब

सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब


एक उम्र सबकी है अनुभव लिए हुए

कुछ चिंतित कुछ कहें क्या वह जिए

सबका कहीं अधूरा सा जीवन सबब

सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब


विपरीत जिंदगी को भी पड़ता है जीना

कहीं कौड़िया मिले कहीं रंगीन नगीना

हर एक का अंदाज़ हर एक का अदब

सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब


कहे आत्मा तो मानिए कि निखर गए

जानेगा कैसे कौन कि क्यों बिखर गए

जीवन को पढ़ते-पड़ते मिले अर्थ गजब

सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब।


धीरेन्द्र सिंह

06.03.2026

22.34


मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

आरक्षण

आरक्षण, आरक्षण

जिसकी चर्चा प्रतिपल-प्रतिक्षण

सुरक्षित कुछ इसमें

कुछ कर रहे आक्रमण

आरक्षण -आरक्षण


संविधान ने बोली बोली

पहुंची ऊपर सर्वहारा टोली

यह भी प्रगति दौर रहा

अब आर्थिक पिछड़े, बोली गोली

करवट रहा बदल कण-कण


कर्म-धर्म-सत्कर्म कहते अपनी बात

विशिष्ट स्थान संग हो विशेष पहचान

यह कैसा बिहान का प्रण

अपना-अपना सबका रण

आरक्षण, आरक्षण


सीमाएं तोड़ रहा आरक्षण

नए पक्ष माँग रहे आरक्षण

क्रिकेट का खेल लोकप्रिय

खिलाड़ी को रखने का प्रण

आरक्षण-आरक्षण।


धीरेन्द्र सिंह

25.02.2026

10.20

भाषा संचेतना

 चल भी न सकें साथ लेकर बौद्धिक वफादारी

कैसे सींचते हैं आप सुरभित जिंदगी की क्यारी

एक पहल ही तो है सर्जना जगत के सब कार्य

अभिव्यक्ति सत्य है तो भाषा में ना हो दुश्वारी


हिंदी की प्रस्तुतियों में अंग्रेजी में प्रतिक्रियाएं

अंग्रेजी मोह नहीं तो क्या है हिंदी मोह खुमारी

बौद्धिकता के दो चेहरे भाषा में जो अस्पष्टता

हिंदी क्षरण पर चुप रहना गूंगों की तरफदारी


हिंदी के पोस्ट पर अंग्रेजी में थैंक यू लिखना

हिंदी का अपमान इस जीवंतता की है शुमारी

चावल में कंकड़ सा लगता है इतर भाषा शब्द

भाषा की शुद्धता भी शिक्षितों की जिम्मेदारी


विद्वान वह है असफल जिनमें भाषा मिश्रित

आश्रित होने पर लुट जाती है जमींदारी

मुझसे जुडना है तो भाषा संचेतना है प्रथम

वरना अकेले ठीक हूँ करते हिंदी की तरफदारी।


धीरेन्द्र सिंह

25.02.2026

05.20

रूठना

रूठने की क्या अदा है समझ नहीं आए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


शब्दों पर हुई चर्चा भाव का हुआ खर्चा

उन्होंने लिख दिया लिखा मैंने भी पर्चा

हिंदी का सिपाही हूँ अंग्रेजी शब्द क्यों आए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


लाइक मेरी रचना को करें तो हैं दिखती

टिप्पणी प्रतिक्रिया ना उनकी तेज थपकी

कहती हैं व्यक्ति विशेष पर लिखा क्यों जाए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


बोलीं कि सबको लिखती अंग्रेजी में लिखा

हिंदी के साधक को अंग्रेजी में लिखा दिखा

मेरे द्वारा अब अंग्रेजी में भाषा शास्त्र कहा जाए

दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं


वह श्रेष्ठ हैं विदुषी हैं करता हूँ उनका सम्मान

चिंतन की प्रक्रिया में स्तब्ध हुआ जो आसमान

आप यह ना पूछें कौन आदि शक्ति है बताएं

दिखती है पर लिखती नहीं, लिखते जाएं।


धीरेन्द्र सिंह

24.02.2026

20.08

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

निपुण चितेरा

चेतना हुई चपल चहक उठा है सवेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा


चित्त बसा चित्र है अभिनव ना विचित्र

भावनाओं की कलियां कल्पना की मित्र

आपका उदय जीवन निर्मल वलय घेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा


शयनपूर्व मेरी रचनाओं पर दे प्रतिक्रियाएं

भोर चहचहाते शब्द कलरव नित जगाएं

आपका सानिध्य सर्जन सूर्य उदय मुंडेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा


प्रदत्त आपका यह अलंकार "निपुण चितेरा"

महत्व मेरे लेखन का आपने जो यूँ उकेरा

तन अपरिचित मन हर्षित चर्चाओं का डेरा

एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा।


धीरेन्द्र सिंह

24.02.2026

05.43

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

साउथ अफ्रीका

 क्या खेल है क्रिकेट

जैसे जंगल का आखेट

लग गया तो लग गया

वरना होता निशाना ठेठ


खूब हंगामा हुआ सब ओर

भारत पर चले ना कोई जोर

सब दे गए अपना विकेट भेंट

कारणों को दें अब तर्क लपेट


साउथ अफ्रीका की टीम

है क्रिकेट की हकीम

चमके गेंद-बल्ले समेत

हल चला जैसे खेत


ऊर्जा, रुपया, समय कर व्यर्थ

इतनी करारी हार का क्या अर्थ

सुपर आठ भारतीय टीम लपेट

साउथ अफ्रीका टीम ने दिया फेंट।


धीरेन्द्र सिंह

23.02.2026

08.09

कोशिश

रात्रि के 11 बज रहे हैं

साउथ अफ्रीका से

हार चुका भारत

टी 20 मैच,


इस पराजय में

याद आयी तुम

जो

करती है संघर्ष खुलकर

और

बदल देती है निर्णय,


यह बताओ

तुम भारतीय क्रिकेट में

क्यों नहीं,

क्या जीत वहीं, जहां

बोले बल्ला 

अभिषेक शर्मा का प्रयास,


मुग्धित है क्रिकेट अभिषेक पर

जैसे

उन्मुक्त प्रशंसक हूँ तुम्हारा

जानती हो

समर्पित कोशिश ने ही

हार को

जीत में है संवारा;


सुनो

तुम जिस अंदाज में

आ जाती हो

जेहन में मेरे, संभावनाएं घेरे

चली जाओ न

लिए अपनी यही ऊर्जा

भारतीय क्रिकेट टीम में,


तुम अजेय हो

इसीलिए बिना तुम्हें बोले

तुम्हारी कामना करता हूँ,

अविजित असाधारण रहो

यही कोशिश

यही कामना करता हूँ।


धीरेन्द्र सिंह

22.01.2026

23.01

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

खिलना

 कोई कैसे खिलता है

कलियों से पूछा तो

बागीचा हंस पड़ा,

पुष्प ने कहा

जिसकी दृष्टि में

जो जंच पड़ा,

उलझन में

काफी देर तक

बागीचे में रहा खड़ा,


खिलना क्या

दृष्टि का विषय है

या कि यह कहीं

संतुष्टि का विषय है,

तर्क उलझाए रहा अड़ा,

बागीचा बोल पड़ा

मात्र किताबी ज्ञान

क्या जाने अनुभव घड़ा,


व्यक्ति रहता है खड़ा

बागीचा में

खिलने का उपाय ढूंढते,

कलियां रहती हैं

मंद-मंद मुस्कराती,

पुष्प रहते हैं बिखेरते

सुगंध, रंग अनेक,

व्यक्ति करते रहता है

खिलने का प्रयास।


धीरेन्द्र सिंह

22.02.2026

06.19

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

भाषा कोंपल उगती नई नई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


21 फरवरी का यह दिन निर्धारण

बहु मातृभाषा आधारित उच्चारण

भाषा भी विपणन की प्रत्याशा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


मातृभूमि से सन्नद्ध रहती मातृभाषा

हिंदी संग सम्बद्ध हैं भारतीय भाषा

वसुधैव कुटुम्बकम लिए आशा नई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


राजभाषा कार्यालयों में रही कराह

राष्ट्रभाषा हिन्दी बोलनेवालों की चाह

मातृभूमि में हिंदी को कई निराशा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


बांग्लादेश की पहल यूनेस्को का स्वीकार

रजत जयंती दिवस बीता ना सुनी हुंकार

बहुभाषा प्रयोग यूनेस्को की अभिलाषा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई।


धीरेन्द्र सिंह

21.02.2026

09.52

नंगनम

प्रतिरोध में अर्धनग्न हो बोल चली जुबां

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा


विश्व के विभिन्न दिग्गजों से पूर्ण मंडपम

एक वर्ग युवा का अचानक हुआ नंगनम

देश में आमंत्रित विश्व अतिथियों को छुवा

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा


वसुधैव कुटुम्बकम है पारम्परिक देश नारा

ए आई ने विश्व संवारने को भारत से पुकारा

टी शर्ट उतारकर युवा देने लगे वादा बद्दुआ

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा


ए आई में विश्व नेतृत्व की भारत की तैयारी

एक वर्ग के युवा के मंडपम में की दुश्वारी

भारत के कुछ युवा उद्वेलित अविवेकी धुआं

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा।


धीरेन्द्र सिंह

20.02.2026

20.46




गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

कोरा कागज

कोरा कागज ही दिल तो रहता है

जब कोई दिलदार मिल जाता है

नई अनुभूतियों के स्पंदन से उभर

नए कोने से नया फूल खिल जाता है


शुरू होती हैं शालीनभरी सूक्तियाँ कई

शब्द, भाषा में भी चमक-दमक आता है

भाव के अर्थ कई निकालता है नित मन

एक अनजाना भी करीब कैसे आता है


प्यार बस एक बार ही होता है अर्धसत्य

तथ्य जीवन के परिणाम नए लाता है

मन अनुरूप मिल जाती अभिव्यक्तियाँ तो

एक गुलाबी सा आवरण सा छा जाता है


हो सायास कुछ प्रयास नई कोशिश भी

तर्ज तब फ़र्ज़ बन खुदगर्ज हो जाता है

अब इसे भाव समझें या कि असभ्यता

खिलता है मन तो दीवाना सा कह जाता है।


धीरेन्द्र सिंह

20.02.2026

06.45

बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

गलगोटिया

गलगोटिया विश्वविद्यालय का आतिथ्य है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है


मौलिकता की हो रही है भूख हड़ताल

नैतिकता की इसमें करे कौन पड़ताल

आवरण आकर्षक लगे क्षद्म व्यक्तित्व है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है


भूत-भविष्य नहीं वर्तमान की है बातें

हिंदी वाले समझें आग सा न इसे बांटे

चीन का रोबोट कुत्ता में क्या लालित्य है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है


सजता है मंच रहते बैठे कई हिंदी डॉक्टर

उबासी लेती पुस्तकों पर बातें तथ्य हटकर

बजती हैं थकी तालियां ऐसा ही कृतित्व है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है।


धीरेन्द्र सिंह

19.02.2026

08.15


मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

तड़के

आप मेरे मन में

होती हैं उदित कई बार

जैसे सागर से उभरे

सूर्य लिए ऊर्जा द्वार


तर्क की कसौटियां लुभावनी

भावना तो बयार पावनी

आप भी पुरवैया बयार

सुगंध की लिए कतार


मन में उभरे लिए छटाएं

भाल तक पहुंच गुनगुनाएं

स्पंदित हो जगे सहस्त्रधार

यही है आपके उभरने की कतार


तड़के खुली पलकें था प्रकाश

मन आलोकित सत्य करता तलाश

आप उभरें मन तत्पर करे करार

कल्पनाओं को करे कौन स्वीकार।


धीरेन्द्र सिंह

18.02.2026

04.46


सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

छोड़ जाता हूँ

अपने लिए जो रचता हूँ

जुड़ खूब उससे सजता हूँ

लचकती डाल सा मोड़ लेता हूँ

फिर वह रचना छोड़ देता हूँ


नित संपर्कियों को पढ़ता हूँ

उत्कर्ष हो ध्येय लेकर रचता हूँ

भटकते भाव लेकर ओढ़ लेता हूँ

फिर वह रचना छोड़ देता हूँ


प्रतिष्ठा को कनिष्ठा सा समझता हूँ

निष्ठा को समझ ऊर्जा दहकता हूँ

अगन के दहन में दिए जोड़ लेता हूँ

फिर वह रचना छोड़ देता हूँ


न छोडूं तो कैसे जी सकता हूँ

अटक जाऊं धीमी आंच पकता हूँ

निरन्तर नित नया रच दौड़ जाता हूँ

फिर वह रचना छोड़ जाता हूँ।


धीरेन्द्र सिंह

17.02.2026

10.31

शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

प्रतिकार

अस्वीकार जब तिरस्कार हो

बिन बोले तब धिक्कार हो

मुहँ मोड़ना होता है तभी

जब संचित घड़ा प्रतिकार हो


तत्क्षण का विरोध अस्थाई

रोष संग यह साथ निभाई

अनियंत्रित उठता गुबार हो

जब संचित घड़ा प्रतिकार हो


अपनापन कोई भेद न माने

ऊंच-नीच हो जाय अनजाने

आकर देहरी अस्वीकार हो

जब संचित घड़ा प्रतिकार हो


अर्थ का अनर्थ निकाला जाए

भाव कलुषता डाल भड़काए

जब छूटता लगे अधिकार हो

जब संचित घड़ा प्रतिकार हो।


धीरेन्द्र सिंह

14.02.2026

16.09


मंगलवार, 13 जनवरी 2026

कूद-फांद

कूद-फांद कर निनाद

जाने कौन छुपा मांद


समय बदल रहा क्या

अभय मचल रहा क्या

पिघल रहा अब विषाद

जाने कौन छुपा मांद


शब्द हैं कालिख पुते

भाव घृणा को जपे

असुरा गूंजे है निनाद

जाने कौन छुपा मांद


शब्दभेदी क्या चले बाण

एकलव्य हैं कई निष्णात

तड़पन बने धड़कन संवाद

जाने कौन छुपा मांद।


धीरेन्द्र सिंह

14.01.2026

06.18




सोमवार, 12 जनवरी 2026

परछाईं

जी रहे हैं खुल जीवन जुगत भरी चतुराई में 

और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में


अपने दिल की धड़कन की चिंता सबको है

अपने खिल हो जाएं पुलकित निजता वो है

क्या-क्या रहे छुपाते जीवन की तुरपाई में

और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में


यादें रंग-बिरंगी फीके प्रभाव में करें आलोड़न

पीड़ाएं दुबकाए कोने हृदय करे प्रायः प्रभु भंजन

जीवन कितना दिया -लिया पारस्परिक बहुराई में

और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में


क्या समझे कितना समझे जब चिंतन हो उथले

जिसको जितना समझा जीवन वैसे थापे उपले

जीवन जोड़-घटाना कर भरी अकुलाहट रंगराई में

और किसके पास क्या है उम्र की परछाईं में।


धीरेन्द्र सिंह

13.01.2026

14.45