रविवार, 17 मई 2026

चाँद बांटिए

चंद लोगों में अक्सर चाँद को बाँटिए
दिल की बेचैनियों को जगह चाहिए
आप यहां-वहां से उठा कहा कीजिए
जिंदादिली की भी कोई वजह चाहिए

मन है मुस्कराता सोचकर बातें नई
मुस्कराने के लिए भी तो लगन चाहिए
दिल यह चाहता है क्या चाहत न समझती
जिंदगी भी है कैसी क्या-क्या न चाहिए

मन है दौड़ता तौलता ऊंच-नीच की बातें
कसक यह है कि कोई तो दहन चाहिए
सब दौड़ते हैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी
सबको अपने रंग का गगन ही चाहिए

खूब कोशिशें होतीं पटाखे-फुलझडियाँ भी
मन है चाहता उत्सव हंसी-ठिठोली चाहिए
हैं जो सयाने चुपचाप किल्लोल में डूबे
सघन प्रयास औरों का है मनटोली चाहिए।

धीरेन्द्र सिंह
18.05.2026
09.11

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