एक मुस्कराती जिंदगी, कमाल है
एक गुनगुनाती जिंदगी, धमाल है
आपके शब्दों में है नटखट शरारत
एक सुगबुगाती रागिनी का ताल है
जी मचल जाता शोखियाँ जताएं शब्द
फब्तियाँ भी मिलती जैसे बेताल हैं
हर तरह के लोग समरसता चाहते
समूह में समूह रचता लिए भूचाल है
कुछ भी लिखना कुछ भी कहना
परिभाषाएं अपनी और अपना गाल है
शब्द द्वारा व्यक्ति को पढ़ने का मजा और
व्यक्ति सोचता वही चतुर दिव्य भाल है
मन बांट देता है टोकरी के फल जैसे
श्रेणियां बनती खुद अनुभव चाल है
कितना भी छुपाए छुप सकता नहीं
कुछ छूट रहा है कुछ का मलाल है।
धीरेन्द्र सिंह
17.052026
06.35
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