आप इस दिल की जिंदगानी हैं
प्यार की हम भी एक कहानी हैं
आपकी हलचलें खामोश हो रहीं
ऐसा लगता हम उबलते पानी हैं
गहन गहराई में भाव तुरपाई करें
अदृश्य देह आत्मा की रवानी है
आप हर बार हवा सा छू रहे हैं
ऐसा लगता हम उबलते पानी है
कहां से राह चली और शाम ढली
जिंदगी हतप्रभ सी अनजानी है
आज भी आस प्यास साँसों में
ऐसा लगता हम उबलते पानी हैं
आपकी ऊष्मा आपकी ऊर्जा है
एक गति मति में संगती ठानी है
प्यार के गुबार में आपका बुखार
ऐसा लगता हम उबलते पानी हैं।
धीरेन्द्र सिंह
29.04.2026
05.56
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