मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

आप

आप इस दिल की जिंदगानी हैं

प्यार की हम भी एक कहानी हैं

आपकी हलचलें खामोश हो रहीं

ऐसा लगता हम उबलते पानी हैं


गहन गहराई में भाव तुरपाई करें

अदृश्य देह आत्मा की रवानी है

आप हर बार हवा सा छू रहे हैं

ऐसा लगता हम उबलते पानी है


कहां से राह चली और शाम ढली

जिंदगी हतप्रभ सी अनजानी है

आज भी आस प्यास साँसों में

ऐसा लगता हम उबलते पानी हैं


आपकी ऊष्मा आपकी ऊर्जा है

एक गति मति में संगती ठानी है

प्यार के गुबार में आपका बुखार

ऐसा लगता हम उबलते पानी हैं।


धीरेन्द्र सिंह

29.04.2026

05.56

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