भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
अपने विश्व की उलझन में दगा दे देना
कितना आसान है अपने को सजा दे देना
कश्तियाँ दोनों की मगन साथ-साथ थीं
हस्तियां अपनी भी सबरंग बेहिसाब थीं
कुतर दिया समाज ने सुझाव दे डैना
कितना आसान है अपनेबको सजा दे देना
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें