आरक्षण, आरक्षण
जिसकी चर्चा प्रतिपल-प्रतिक्षण
सुरक्षित कुछ इसमें
कुछ कर रहे आक्रमण
आरक्षण -आरक्षण
संविधान ने बोली बोली
पहुंची ऊपर सर्वहारा टोली
यह भी प्रगति दौर रहा
अब आर्थिक पिछड़े, बोली गोली
करवट रहा बदल कण-कण
कर्म-धर्म-सत्कर्म कहते अपनी बात
विशिष्ट स्थान संग हो विशेष पहचान
यह कैसा बिहान का प्रण
अपना-अपना सबका रण
आरक्षण, आरक्षण
सीमाएं तोड़ रहा आरक्षण
नए पक्ष माँग रहे आरक्षण
क्रिकेट का खेल लोकप्रिय
खिलाड़ी को रखने का प्रण
आरक्षण-आरक्षण।
धीरेन्द्र सिंह
25.02.2026
10.20
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