कोई कैसे खिलता है
कलियों से पूछा तो
बागीचा हंस पड़ा,
पुष्प ने कहा
जिसकी दृष्टि में
जो जंच पड़ा,
उलझन में
काफी देर तक
बागीचे में रहा खड़ा,
खिलना क्या
दृष्टि का विषय है
या कि यह कहीं
संतुष्टि का विषय है,
तर्क उलझाए रहा अड़ा,
बागीचा बोल पड़ा
मात्र किताबी ज्ञान
क्या जाने अनुभव घड़ा,
व्यक्ति रहता है खड़ा
बागीचा में
खिलने का उपाय ढूंढते,
कलियां रहती हैं
मंद-मंद मुस्कराती,
पुष्प रहते हैं बिखेरते
सुगंध, रंग अनेक,
व्यक्ति करते रहता है
खिलने का प्रयास।
धीरेन्द्र सिंह
22.02.2026
06.19
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