बारिश का अपना नशा है
यदि कोई दिल में बसा है
घटाएं घिर-घिर दौड़ी आएं
जैसी यादें फिर-फिर आए
भाव ने भाव को कसा है
यदि कोई दिल में बसा है
अलगाव में भी निभाव है
वृक्ष कहीं बदलियों की छांव है
हर हाल में जीवन सजा है
यदि कोई दिल में बसा है
व्यक्ति से व्यक्ति हो जाता दूर
मेघ बरसते यह मिलन दस्तूर
शीतल हवाएं उमंगी दशा है
यदि कोई दिल में बसा है
देह नहीं नेह का संसार
स्नेह को प्रत्यक्ष कहां दरकार
धरा व्योम का फलसफा है
यदि कोई दिल में बसा है।
धीरेन्द्र सिंह
07.08.2026
08.55