रविवार, 22 फ़रवरी 2026

कोशिश

रात्रि के 11 बज रहे हैं

साउथ अफ्रीका से

हार चुका भारत

टी 20 मैच,


इस पराजय में

याद आयी तुम

जो

करती है संघर्ष खुलकर

और

बदल देती है निर्णय,


यह बताओ

तुम भारतीय क्रिकेट में

क्यों नहीं,

क्या जीत वहीं, जहां

बोले बल्ला 

अभिषेक शर्मा का प्रयास,


मुग्धित है क्रिकेट अभिषेक पर

जैसे

उन्मुक्त प्रशंसक हूँ तुम्हारा

जानती हो

समर्पित कोशिश ने ही

हार को

जीत में है संवारा;


सुनो

तुम जिस अंदाज में

आ जाती हो

जेहन में मेरे, संभावनाएं घेरे

चली जाओ न

लिए अपनी यही ऊर्जा

भारतीय क्रिकेट टीम में,


तुम अजेय हो

इसीलिए बिना तुम्हें बोले

तुम्हारी कामना करता हूँ,

अविजित असाधारण रहो

यही कोशिश

यही कामना करता हूँ।


धीरेन्द्र सिंह

22.01.2026

23.01

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

खिलना

 कोई कैसे खिलता है

कलियों से पूछा तो

बागीचा हंस पड़ा,

पुष्प ने कहा

जिसकी दृष्टि में

जो जंच पड़ा,

उलझन में

काफी देर तक

बागीचे में रहा खड़ा,


खिलना क्या

दृष्टि का विषय है

या कि यह कहीं

संतुष्टि का विषय है,

तर्क उलझाए रहा अड़ा,

बागीचा बोल पड़ा

मात्र किताबी ज्ञान

क्या जाने अनुभव घड़ा,


व्यक्ति रहता है खड़ा

बागीचा में

खिलने का उपाय ढूंढते,

कलियां रहती हैं

मंद-मंद मुस्कराती,

पुष्प रहते हैं बिखेरते

सुगंध, रंग अनेक,

व्यक्ति करते रहता है

खिलने का प्रयास।


धीरेन्द्र सिंह

22.02.2026

06.19

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

भाषा कोंपल उगती नई नई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


21 फरवरी का यह दिन निर्धारण

बहु मातृभाषा आधारित उच्चारण

भाषा भी विपणन की प्रत्याशा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


मातृभूमि से सन्नद्ध रहती मातृभाषा

हिंदी संग सम्बद्ध हैं भारतीय भाषा

वसुधैव कुटुम्बकम लिए आशा नई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


राजभाषा कार्यालयों में रही कराह

राष्ट्रभाषा हिन्दी बोलनेवालों की चाह

मातृभूमि में हिंदी को कई निराशा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई


बांग्लादेश की पहल यूनेस्को का स्वीकार

रजत जयंती दिवस बीता ना सुनी हुंकार

बहुभाषा प्रयोग यूनेस्को की अभिलाषा हुई

हिंदी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा हुई।


धीरेन्द्र सिंह

21.02.2026

09.52

नंगनम

प्रतिरोध में अर्धनग्न हो बोल चली जुबां

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा


विश्व के विभिन्न दिग्गजों से पूर्ण मंडपम

एक वर्ग युवा का अचानक हुआ नंगनम

देश में आमंत्रित विश्व अतिथियों को छुवा

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा


वसुधैव कुटुम्बकम है पारम्परिक देश नारा

ए आई ने विश्व संवारने को भारत से पुकारा

टी शर्ट उतारकर युवा देने लगे वादा बद्दुआ

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा


ए आई में विश्व नेतृत्व की भारत की तैयारी

एक वर्ग के युवा के मंडपम में की दुश्वारी

भारत के कुछ युवा उद्वेलित अविवेकी धुआं

अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता में किए क्या युवा।


धीरेन्द्र सिंह

20.02.2026

20.46




गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

कोरा कागज

कोरा कागज ही दिल तो रहता है

जब कोई दिलदार मिल जाता है

नई अनुभूतियों के स्पंदन से उभर

नए कोने से नया फूल खिल जाता है


शुरू होती हैं शालीनभरी सूक्तियाँ कई

शब्द, भाषा में भी चमक-दमक आता है

भाव के अर्थ कई निकालता है नित मन

एक अनजाना भी करीब कैसे आता है


प्यार बस एक बार ही होता है अर्धसत्य

तथ्य जीवन के परिणाम नए लाता है

मन अनुरूप मिल जाती अभिव्यक्तियाँ तो

एक गुलाबी सा आवरण सा छा जाता है


हो सायास कुछ प्रयास नई कोशिश भी

तर्ज तब फ़र्ज़ बन खुदगर्ज हो जाता है

अब इसे भाव समझें या कि असभ्यता

खिलता है मन तो दीवाना सा कह जाता है।


धीरेन्द्र सिंह

20.02.2026

06.45

बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

गलगोटिया

गलगोटिया विश्वविद्यालय का आतिथ्य है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है


मौलिकता की हो रही है भूख हड़ताल

नैतिकता की इसमें करे कौन पड़ताल

आवरण आकर्षक लगे क्षद्म व्यक्तित्व है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है


भूत-भविष्य नहीं वर्तमान की है बातें

हिंदी वाले समझें आग सा न इसे बांटे

चीन का रोबोट कुत्ता में क्या लालित्य है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है


सजता है मंच रहते बैठे कई हिंदी डॉक्टर

उबासी लेती पुस्तकों पर बातें तथ्य हटकर

बजती हैं थकी तालियां ऐसा ही कृतित्व है

रोबोट कुत्ता ऐसा जैसा हिंदी साहित्य है।


धीरेन्द्र सिंह

19.02.2026

08.15


मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

तड़के

आप मेरे मन में

होती हैं उदित कई बार

जैसे सागर से उभरे

सूर्य लिए ऊर्जा द्वार


तर्क की कसौटियां लुभावनी

भावना तो बयार पावनी

आप भी पुरवैया बयार

सुगंध की लिए कतार


मन में उभरे लिए छटाएं

भाल तक पहुंच गुनगुनाएं

स्पंदित हो जगे सहस्त्रधार

यही है आपके उभरने की कतार


तड़के खुली पलकें था प्रकाश

मन आलोकित सत्य करता तलाश

आप उभरें मन तत्पर करे करार

कल्पनाओं को करे कौन स्वीकार।


धीरेन्द्र सिंह

18.02.2026

04.46