क्या खूब क्या उत्तम है यह सोचा
मुंबई में इमारतों पर होगा बगीचा
मूल कारण है पर्यावरण का नियंत्रण
स्थान नहीं, हो कहां पर वृक्षारोपण
छत पर सुविधा से जाता रहे सींचा
मुम्बई में इमारतों पर होगा बगीचा
अस्सी की दशक तक थी कहानियां
छत पर इश्क की नव कारस्तानियां
वह दौर लौट आया चाहत ने खींचा
मुम्बई में इमारतों पर होगा बगीचा
सूर्योदय हो या कि हो चांदनी रात
हमेशा बिखरा होगा मानव जज्बात
होगी प्रतियोगिता किसने क्या खींचा
मुम्बई में इमारतों पर होगा बगीचा
चाँद भी छत पर होगा चांदनी भी
राग प्रणय होगा खिली रागिनी भी
होगी सुरक्षित जगह ना ऊंचा नीचा
मुम्बई में इमारतों पर होगा बगीचा।
धीरेन्द्र सिंह
20.03.2025
08.33
अच्छा निर्णय है
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