सोमवार, 21 सितंबर 2026

आपके नाते

मजबूर कर रही हैं आपकी बातें
दिल झुक रहा है आपके नाते



हर पोस्ट आपकी भावना दर्शाती

क्या सोचती जाएं आप है बतलाती

कुछ कल्पना आपकी कुछ बीती बातें

दिल झुक रहा है आपके नाते


मन महक उठता है बहक उगता है

भावनाओं की भूख में चहक चुगता है

आप उभर उठती हैं संभावना बांधे

दिल झुक रहा है आपके नाते

आप क्या हैं किसकी हैं फर्क नहीं
जीवंत हृदय स्वामिनी हैं तर्क नहीं
बस आकर्षण आपका दिल मेरा साधे
दिल झुक रहा है आपके नाते।

धीरेन्द्र सिंह
22.09.2026
03.59

रविवार, 20 सितंबर 2026

लौटा दिया

मुझे ना बुलाती मुझे ना सुनाती
है दुनिया में अपने दुनिया सजाती
है गुस्सा बहुत देखना नहीं चाहे
लगन है यह मेरी मुझी से छुपाती






बहुत था जतन थे बहुत से भी वादे
गगन में सहन था बादल थी सजाती
थे हतप्रभ निरख सज्जा सब विहंगम
धुन अपने में थी बढ़ती मुझको छुपाती

दरवाजे से मुझको लौटा दिया था
पहले देहरी मेरे आगमन पर थी सजाती
क्यों आए चले जाओ बोल थी खड़ी
क्षद्म नाराजगी में वेदना को।छुपाती

कई वर्ष बीते यादों से हैं ना रीते
जिंदगी भी है जिंदगी को सजाती
कुछ ना टूटा ना छूटा स्पंदन वही है
धड़कन अक्सर है अब तड़पन छुपाती।

धीरेन्द्र सिंह
21.09.2026
08.21