शनिवार, 12 सितंबर 2026
आगमन है
आगमन है आपका, आचमन है आपका
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
हे गणेश
हे गणेश
आप अशेष
देश क्या
पूजे विदेश
प्रथम आराध्य नमन
सृष्टि में सुलभ गमन
बुद्धि के प्रणेता
सन्मुख सदा उपस्थिति
फल देते वैसा ही
जैसी जिसकी नियति
गणपति दूर करें वहम
सुमति दृष्टि में रहे सुगम
सृष्टि में विधान है
आप में ज्ञान है
वृष्टि कई भावों की
आप में ही ध्यान है
गजानन को अर्पित सुमन
मनन मुग्धित करे नमन।
धीरेन्द्र सिंह
12.07.2026
07.47
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
मन
कब झांका व्यक्ति दिल से मन के उपवन में
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन में
गुरुवार, 3 सितंबर 2026
कृष्ण
सृजन की वेदना कब समसीतोष्ण है
मनन जीवन का तप हो तो कृष्ण हैं
सोमवार, 31 अगस्त 2026
भावनाएं
आप शब्द हैं अभिव्यक्ति हैं आसक्ति हैं
स्वीकारिए या नकारिये आपकीं मर्जी
दिल भावनाओं का चितेरा है एक आम सा
बुनता है कल्पनाएं सिलता जैसे दर्जी
रविवार, 30 अगस्त 2026
मनुष्य की बात
उपलब्धियों पर मुस्कराहटों के उपहार
परिलब्धियों में टूटा बिखरा, लिया संवार
जो देख रहे वह नहीं अंतिम सत्य है
सूखे से लगते जख्म देते अक्सर चिंघाड़
बुधवार, 26 अगस्त 2026
सत्य अड़ा है
बानगी तो देखिए सत्य अड़ा है
अचंभित है जग कहां पर धड़ा है
मंगलवार, 25 अगस्त 2026
दृष्टि
कामना की याचना है और सृष्टि है
सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है
आप अपनी उलझनों के हैं पहरेदार
दूसरा अपनी समस्याओं का तारणहार
भावनाओं की सतत विभिन्न वृष्टि है
सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है
मोहक, सम्मोहक संवेदक विभेदक
चेतना के चपल चाह विज्ञ सचेतक
अभिलाषाएं पलक पर चंद्र समिष्ट है
सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है
पढ़ना सब वस्तुतः असम्भव ही है
सोमवार, 24 अगस्त 2026
रिश्ते
कुछ छूट गया खुद से कुछ छूट रहा है
जोड़ने को जीवन कोशिश में टूट रहा है
एक व्यक्ति नहीं व्यक्ति रिश्तों का झुंड है
छूटता हृदय नयन से अपनत्व ढूंढ रहा है
रविवार, 23 अगस्त 2026
गीत
गीत ही है जिंदगी गीत ही आधार है
मीत ही है बंदगी मीत ही जग प्यार है
शनिवार, 22 अगस्त 2026
सईयां
सईयां सात जनम नही धाए संग एहि जनम भाए
आज का दिन बस यूं ही बीता खुल नहीं जी पाए
शुक्रवार, 21 अगस्त 2026
प्यार
मन का संतोष है भाव विशेष है निज झंकार
हृदय हर्षाता स्नेह बरसाता हो जाता है प्यार
गुरुवार, 20 अगस्त 2026
अपने
तिलमिलाती जिंदगी संवरने को अति व्यग्र
यही जीवन संघर्ष है युक्तिपूर्ण गति समग्र
बुधवार, 19 अगस्त 2026
जागना है
हर व्यक्ति की आराधना है साधना है
एक ही प्रयास और गहन जागना है
मंगलवार, 18 अगस्त 2026
शब्द
शब्द अपने सदन में एकल पुखराज हैं
भाव अपने गगन में मूक सा सरताज है
अभिव्यक्तियां ही इनको सजाती रहतींभाषा इसीलिए व्यक्तित्व का हमराज है
गढ़ रहा है कथ्य भाषा तथ्य की अभिलाषापढ़ रहा जो वाक्य अर्थ कई मिजाज हैंशब्द तह स्पंदन खींचे, भाव आंखे मीचेशब्द की परिभाषाओं के संदर्भ अंदाज हैं
रंग बदलते ढंग बदलते रूप है अपरिवर्तनीयशब्द अक्षर संयोजन से बनते गजराज हैंपढ़ चुका जो गढ़ चुका वह भी कहीं अपूर्णसंदर्भ गति से शब्दों का संभव यह राज है
सबकी अपनी शैली है भाषा ऐसे फैली हैशब्द चयन भिन्न हैं पर वाक्य के साज हैंकल यही थे शब्द पर भाषा के तेवर और थेजुड़ते इतर शब्द मुड़ते सम्प्रेषण रियाज़ हैं।
धीरेन्द्र सिंह18.08.202620.48
भाव अपने गगन में मूक सा सरताज है
अभिव्यक्तियां ही इनको सजाती रहतीं
शनिवार, 15 अगस्त 2026
पोस्ट आपका
आप मुझसे हर समय गीत का वादा करें
प्रणय पाहुन सा नित रोज ही मिलता रहे
हृदय आकुल हृदय व्याकुल को ही चाहे
भावनाएं कामनाएं योजनाएं सरसता रहे
शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
स्वतंत्रता
स्वतंत्रता के तंत्र में यंत्रवत क्यों रहें
जिज्ञासा जहां कहे उसी ओर हम बहें
स्मृति में
स्मृति में उभरे आपके भाव टटोलता रहूं
कभी चेहरा अपना ध्यान से मैं देखता रहूं
बुधवार, 12 अगस्त 2026
व्यक्ति और समाज
भावनाएं जग रही हैं अपनी ताल में
समाज चितेरा है लगा अपनी चाल में
मंगलवार, 11 अगस्त 2026
सोमवार, 10 अगस्त 2026
जिंदगी
व्यक्ति भी एक किताब का हिसाब है
त्रुटियां कहीं नहीं हिसाब लाजवाब है
रविवार, 9 अगस्त 2026
समाज
किस समाज की यह अवहेलना है
समाज से समाज को क्यों खेलना है
तख्तियों पर लिख गए हैं भाव कई
विचार से विचारों को लगे ठेलना है
धूप तपती दहकती बह रही है कहीं
चाँदनी का धर्म क्या हरदम बहकना है
व्यक्ति के लिए व्यक्ति ही है जरूरी भी
व्यक्तित्व रहे बना रंग अपना दमकना है
समाज ही साम्राज्य समाज ही विवाद
समाज की तरह जीवन को बेलना है
अवहेलना की कीमत चुकाते कई वर्ग
जो बढ़ चुके हैं आगे उन्हें क्या कहना है
शुक्रवार, 7 अगस्त 2026
"तुम पसंद आए, यह इत्तेफ़ाक था..."
छत्तीसगढ़ का यह गायक
बना अनुभूति का नायक
गुरुवार, 6 अगस्त 2026
बारिश का नशा
बारिश का अपना नशा है
यदि कोई दिल में बसा है
घटाएं घिर-घिर दौड़ी आएं
जैसी यादें फिर-फिर आए
भाव ने भाव को कसा है
यदि कोई दिल में बसा है
अलगाव में भी निभाव है
वृक्ष कहीं बदलियों की छांव है
हर हाल में जीवन सजा है
यदि कोई दिल में बसा है
व्यक्ति से व्यक्ति हो जाता दूर
मेघ बरसते यह मिलन दस्तूर
शीतल हवाएं उमंगी दशा है
मंगलवार, 4 अगस्त 2026
कविता
कविता
उभरती है
एक नावयौना की तरह
शनिवार, 1 अगस्त 2026
सावन
शब्द चुपके आ पहुंचा भावनाओं का बन संवाहक
आप संशय में हैं उलझे समस्या यह उत्पन्न नाहक
गुरुवार, 30 जुलाई 2026
गठरी
अपनी उमर अपनी गठरी दौड़ रही अपनी पटरी
लक्ष्य सबके अपने-अपने सपनों की सावनी कजरी
मंगलवार, 28 जुलाई 2026
कहाँ हो
तुम मुझसे ख़फ़ा होकर दगा दे गई
मंज़िल का ना पता क्या सदा दे गई
आज
तथ्य कह रहा है कि सत्य नाराज है
कल तक था नहीं हो रहा जो आज है
अस्तित्व
कुछ गीत गुनगुनाइए प्रतीत तो हो
अस्तित्व प्रश्नचिन्हित कोई गीत तो हो
रविवार, 26 जुलाई 2026
जेन-जी और भाषा
जेन-जी हुजूम जंतर-मंतर परिवर्तनीय ले जिज्ञासा
सुनने वाले हो गए हतप्रभ देखकर इनकी भाषा
शनिवार, 25 जुलाई 2026
त्रिभुजी पत्रकार
त्रिभुज का अपना विशेष महत्व है जो दर्शाता है कि जिस को से भी देखी जाए उर्ध्वगामी ही दिखती है। पत्रकार यदि त्रिभुजी रूप में कार्यरत रहते हैं तो वह सामाजिक चेतना को विभिन्न आयाम देते हैं जिससे समाज यथोचित प्रगति, सहमति और प्रदर्शन कर पाता है। त्रिभुज का एक दूसरा रूप भी है जिसमें पंख पसारे व्योम को चूमने या लक्ष्य को भेदने की अभिलाषा नजर आती है। डॉ अरविंद सिंह को मैंने हमेशा त्रिभुजी के रूप में ही पाया है। त्रिभुजी पत्रकार के प्रमुख तीन अंग होते हैं सत्य के संग, सामान्य जनता की ओर तथा नएपन की उपलब्ध संसाधनों में पहचान।
त्रिभुजी पत्रकार डॉ अरविंद सिंह अपने पत्रकारिता जीवन में सत्य का साथ पकड़कर समय-समय पर सत्य का साथ दिया। पत्रकारिता में सत्य को दस्तावेजी रूप देने के लिए इन्होंने "सामयिक ब्लिट्ज" नामक साप्ताहिकी का प्रकाशन वाराणसी से आरम्भ किया। यहां त्रिभुजी पत्रकारिता का एक पक्ष "सत्य" प्रमाणित हो रहा है। दूसरा पक्ष है सामान्य जनता की ओर बढ़ना। यहां सामान्य जनता की विभिन्न परिभाषाएं हो सकती हैं किंतु यदि वाराणासी को ध्यान में रखकर सामान्य जनता की पहचान की जाए तो ग्रामीण जनों का पक्ष प्रमुख रहेगा। इस पक्ष को प्रमाणित करता है त्रिभुजी पत्रकार डॉ अरविंद सिंह का नियमित अपने साप्ताहिकी "सामयिक ब्लिट्ज" को निःशुल्क कुछ गांव को उपलब्ध कराना। प्रसंगवश उल्लेख किया जा रहा है कि ग्रामीण साप्ताहिकी की प्रतीक्षा उत्सुकतापूर्वक करते हैं। उपलब्ध संसाधनों में नएपन का प्रमाण इस त्रिभुजी पत्रकार के वाराणसी में आयोजित विभिन्न कार्यक्रम तथा अनेक मंदिर निर्माण, गरीबोंनको भोजन एवं कंबल आदि वितरण से जुड़ा है।
वाराणसी के स्पंदनों को जितनी कुशलता से इस त्रिभुजी पत्रकार ने अपनी पुस्तकों में समेटा है ऐसा उदाहरण वर्तमान में कहीं देखने को नहीं मिल रहा है। प्रत्येक अच्छे और बड़े काम में एक धुन होती है लय होती है जिसके आधार पर कार्यों में लयबद्धता बनी रहती है। यदि इन त्रिभुजी पत्रकार महोदय की धुन की बात करें तो वह हैं वाराणसी के सांसद और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तथा लय है विशेषकर वाराणसी के समग्र विकास गति। पिछले कुछ वर्षों से लगातार पुस्तकों का प्रकाशन वाराणसी के पल-पल, छिन-छिन का पारदर्शी दस्तावेज सा है। यह पुस्तक पत्रकार की डायरी की त्रिभुजी पत्रकार डॉ अरविंद सिंह के काशी के प्रति समर्पण और अनुराग को दर्शाता है। यह पुस्तक भी एक पारदर्शी दस्तावेज की तरह है।
धीरेन्द्र सिंह
कवि और ब्लॉगर
शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
रिश्ते
रिश्तों की डोर में न मिलता ओर-छोर
भोर जिंदगी का बंदगी करे भी तो क्या
सूर्य किरणें जगाती सजाती हैं निसदिन
पक्षियों की चहचआहट लगे क्या नया
डायरी क्यों
डायरी क्यों
एक स्वाभाविक प्रश्न सहज ही इस पुस्तक के प्रबुद्ध पाठक के मन में उभर सकता है कि पत्रकार की डायरी क्यों ? इसे कदापि न स्वीकारा जाए कि इस पुस्तक के लेखक व पत्रकार की यह कोई निजी डायरी है। सामान्यतया प्रत्येक पत्रकार की अपनी डायरी होती है जिसके आधार पर वह पत्रकारिता को गतिशील बनाने में होता है। यदि इस पुस्तक विशेष की बात की जाए तो यह डायरी सार्वजनिक जीवन के सार्वजनिक समाचार का सार्वजनिक हित सूचक है। ज्ञातव्य है कि प्रत्येक पत्रकार की अपनी डायरी होती है किंतु कभी-कभी ऐसे व्यक्तित्व का प्रादुर्भाव होता है कि एकल व्यक्तित्व आधारित डायरी निर्मित हो जाती है।
"माँ गंगा ने बुलाया है" यह आस्थापूर्ण वाक्य भारतीय जनमानस के पटलनपर एक चेहरा उभरता है जिसे विश्व नरेंद्र मोदी के नाम से पहचानता है। काशी में इतना प्रबल, प्रखर और प्रियग्राही वाक्य गंगा तट पर नहीं गूंजा था। इसे वाक्य कहना भी इस वाक्य में निहित आस्था, सम्मान और समर्पण के प्रति न्यायोचित नहीं होगा। यह एक वाक्यबनाहीं बल्कि वाराणसी के लिए विशेष तौर पर एक सूक्ति बन गया था जो अब भी बनारस की हवाओं में गूंज रहा था। यहीं से पत्रकार दृष्टिकोण ने चेताया कि अब काशी में कुछ अति विशिष्ट होने की प्रबल संभावनाएं है। पत्रकारिता धर्म ने नरेंद्र मोदी को वाराणासी में गहनता से समझना और प्रत्येक गतिविधियों को सहेजना आरम्भ किया और निर्मित हो गयी पत्रकार की डायरी जो आपके समक्ष प्रस्तुत है।
डायरी की यह प्रस्तुति धरा पर गंगा अवतरण के उल्लेख के बिना अपूर्ण कहा जा सकता है। भगीरथ या भागीरथ की घोर तपस्या और दृढ़ निश्चय के बल पर ब्रह्मा के सुझाव पर शंकर ने अपनी जटा के द्वारा गंगा के असाधारण वेग को नियंत्रित कर धरा पर प्रवाहित किया। जटा जो वर्तमान में बुद्धिबल और दृष्टिकोण बल के समानार्थी है उसका प्रदर्शन नरेंद्र मोदी ने काशी में किया। इस बल के परिणामस्वरूप वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का ही निर्माण नहीं हुआ बल्कि अयोध्या में राम मंदिर भी अपनी भव्यता और दिव्यता के साथ पुनर्स्थापित हुआ। यदि कहा जाए कि सनातन धर्म के लिए नरेंद्र मोदी का प्रयास भगीरथ प्रयास था तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
इसे योगायोग कहा जाए या सुखद संयोग कि जिस कुल में भगीरथ का जन्म हुआ वही कुल इस पुस्तक के लेखक का भी है। परंपराओं के गौरव का उल्लेख हर कोई करता है इसलिए प्रसंगवश इस तथ्य का भी उल्लेख किया गया। गंगा सदियों से काशी से सटी हुई गतिमान हैं किंतु नरेंद्र मोदी के वाराणसी का सांसद बनने के बाद जो अभिमान काशी को हुआ है वह भगीरथ प्रयास ही तो है। बनारसी साड़ी की तरह नरेंद्र मोदी काशी को नए धागे से बुनते और संवारते गए जिससे भारत देश ही नहीं बल्कि विश्व का भी ध्यानाकर्षण हुआ। बदला हुआ आकर्षक काशी पहले से बहुत अधिक लोगों को आकर्षित कर रही है। तमिल संगमम के द्वारा उत्तर भारतौर दक्षिण भारत के बीचेक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक पुल निर्मित करना नरेंद्र मोदी की ही दूरदर्शिता है।
समय कभी टूटता नहीं है बल्कि वह परिवर्तित होता है नए रंग और ढंग में और निरंतर गतिमान रहता है। इस गतिमान समय पर काशी की मूल प्रवृत्ति को बरकरार रखते हुए नई चित्रकारी कर देना नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व के लिए ही संभव है। बनारस नरेंद्र मोदी को नव रचयिता के रूप में भी जानता है। एक पत्रकार घटित लगभग सभी घटनाओं का साक्षी होता है। तथ्य ही नहीं बल्कि सत्य आधारित तथ्य को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना पत्रकार का धर्म है। एक पत्रकार की दृष्टि जब समाज और उसके परिवेश में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की सफल उपलब्धियों का क्रम निर्मित करता है तब कहीं जाकर एक पत्रकार की डायरी सजती है। उल्लेखनीय है कि गंगा और शिव आधारित काशी है जिसे नरेंद्र मोदी ने संवारा है अतएव भगीरथ, शिव, गंगा, विश्वनाथ धाम, अयोध्या का राम मंदिर आदि डायरी के प्रेतक ऊर्जा हैं। आपके समक्ष इस डायरी को प्रस्तुत करते हुए प्रसन्नता हो रही है।





