सोमवार, 22 जून 2026

कोचिंग क्लास

कोचिंग क्लासेस एक प्रचलित शब्द
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध 

व्यवसाय हो गयी है भारतीय शिक्षा
याद करो लिख दो उत्तीर्ण परीक्षा
रटंत विद्या में सक्रिय कोचिंग संबंध
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध

लखनऊ में कोचिंग क्लास जल गया
होनहारों संग देश भविष्य तल गया
खोया जिन्होंने बच्चे क्या है यह प्रारब्ध
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध

सख्त निगरानी में रखे जाएं कोचिंग
आत्महत्या, झगड़े, आगजनी है निंद
श्रद्धांजलि देती यह व्यवस्था निःशब्द
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध।

धीरेन्द्र सिंह
23.06.2026
03.15

फोटो रचना

श्रम को कर्म के भ्रम में लेना
जैसे खटिया बिन सजा बिछौना
श्रमिक उठाता बोझ को दिनभर
साँझ ना पाता खरीद खिलौना





मिलते है ऐसे वाक्य कई बोलते
जैसे कोई खाद्य संभाला हो दोना
कर्म को सिकोड़कर दे नए अर्थ
श्रम को दे दिए करीब का कोना

संलग्न फोटो को देखिए बोल रहा
गर्मी में प्यासा नहीं जल भगोना
नहीं जलाशय ना ही जल चमक
कबूतर की प्यास तड़प थका डैना

गमले की तलहटी तक पहुंच हुई
संकट हो भारी निराशा क्यों बोना
चोंच अपनी से बूंद रहा खींच है
इसे कहते मौलिक अविष्कार होना।

धीरेन्द्र सिंह
22.06.2025
19.37




रविवार, 21 जून 2026

बदरिया

बदरिया भरकर बरसने को आ रही
मन भींगने के लिए तैयार हो रहा है 
एक प्यास धरा का व्यक्ति का भी, कहे
गर्जना, पूरब दूर से पुकार हो रहा है






कुछ भी न होता अचानक, भूमिका बने
खुद को न हो पता यह क्या हो रहा है
व्योम में बदलियों भरी हुई असंख्य हैं
क्या बात बूंद एक बदली का भिंगो रहा है

कहां से चली कहां छाई कहां पर बरसी
दूजी बदरी टकराई विद्युत बरस रहा है
आकर्षण कहें या चाहत या जन्मों का खेल
सब कुछ तो पास है पर मन तरस रहा है

घर के शॉवर से भींगना भी जैसे बरसात
फिर क्यों मन उन्मुक्त बदरी निरख रहा है
बंधनहीन उन्मुक्त छाँवमुक्त जीना चाहे
आदिकाल से ही जीवन मौसम परख रहा है।

धीरेन्द्र सिंह
22.06.2026
07.25