बहुबोली, बहुभाषाएँ संग हैं नव आशाएं
धर्म प्रमुख बना दावेदार देश क्या बताए
धर्म संकुचित करने पर कुछ लोग आमादा
भाषा जिसमें उभर रही है ओढ़े भाव लबादा
राष्ट्रीयता के ओर-छोर पर तिरंगा है लहराए
धर्म प्रमुख बना दावेदार देश क्या बताए
प्रजातंत्र है मौलिक अधिकारों की आजादी
यह क्या भाषा-धर्म की इतनी प्रखर मुनादी
मानवता का सेतु सुहाना ऐसे कैसे बनाएं
धर्म प्रमुख बना दावेदार देश क्या बताए
सर्वभाव, सर्वधर्म, सर्वभाषा के हैं अनुरागी
यह भारत है हिलमिल, झिलमिल का रागी
कुछ हंगामे, कुछ हलचल को मुद्दा ना बनाएं
धर्म प्रमुख बना दावेदार देश क्या बताए।
धीरेन्द्र सिंह
23.09.2026
06.04