बुधवार, 29 अप्रैल 2026

जीवन

 उम्र तन्मय हो गया है आस का उन्माद
जीवन झंझावात में कहां मधुर संवाद

आर्थिक आजादी ही सर्वप्रमुख अभियान
स्वार्थ सिद्ध के खातिर करते हैं गुणगान
जीवन ऊर्जा सूख रही मिले न पानी खाद
जीवन झंझावात में कहां मधुर संवाद

देह तलक ही नेह है नखशिख सौंदर्य
भौतिकता में उलझे ना आत्मिक सौकर्य
नेह डगरिया नहीं गगरिया मन पनघट नाद
जीवन झंझावात में कहां मधुर संवाद

उम्र गुजरती राह बदलती और बदले चाल
आज सुन रहे कल बदलती उम्र अपनी ताल
पकड़-धकड़ कर उम्र को रोकें यौवन विवाद
जीवन झंझावात है कहाँ मधुर संवाद।

धीरेन्द्र सिंह
30.04.2026
08.27

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