भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
▼
बुधवार, 29 अप्रैल 2026
जीवन
उम्र तन्मय हो गया है आस का उन्माद जीवन झंझावात में कहां मधुर संवाद
आर्थिक आजादी ही सर्वप्रमुख अभियान स्वार्थ सिद्ध के खातिर करते हैं गुणगान जीवन ऊर्जा सूख रही मिले न पानी खाद जीवन झंझावात में कहां मधुर संवाद
देह तलक ही नेह है नखशिख सौंदर्य भौतिकता में उलझे ना आत्मिक सौकर्य नेह डगरिया नहीं गगरिया मन पनघट नाद जीवन झंझावात में कहां मधुर संवाद
उम्र गुजरती राह बदलती और बदले चाल आज सुन रहे कल बदलती उम्र अपनी ताल पकड़-धकड़ कर उम्र को रोकें यौवन विवाद जीवन झंझावात है कहाँ मधुर संवाद।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें