रविवार, 28 दिसंबर 2025

अस्तित्व

अकेले अस्तित्व का ही निनाद है

सत्य यह कि निजत्व का विवाद है


प्रश्रय पुंजत्व का मुग्ध पुष्पधारी पक्ष

प्रेम में दुरूहता उभरता जब यक्षप्रश्न

यथोचित उत्तर ही प्रमुख संवाद है

सत्य यह कि निजत्व का विवाद है

1 टिप्पणी:

  1. इन पंक्तियों ने मुझे ठहरकर सोचने पर मजबूर किया। आप बड़े सीधे ढंग से अस्तित्व और निजत्व की टकराहट दिखाते हैं। अकेलापन यहाँ कमजोरी नहीं, बल्कि चेतना की आवाज़ बन जाता है। प्रेम में जब सवाल कठिन होते हैं, तब आप संवाद को ही रास्ता बताते हैं, और यह बात बहुत सटीक लगती है।

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