भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
▼
शनिवार, 26 सितंबर 2026
कौन किससे
कौन किससे निबद्ध है कहाँ कैसे आबद्ध है यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें