भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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मंगलवार, 5 मई 2026
पोस्ट
दिखती कम मौलिकता नकल का है ताना-बाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना
हर सामान्य पोस्ट में दिखे यौवन की ही लयकारी यौवन कहां है न दिखता लगे यथार्थ से है पर्देदारी चापलूसी उथले मजाक से संभव है क्या जीत जाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना
कॉपी-पेस्ट का बढ़ते चलन में पोस्ट का पुनरावर्तन मौलिक लेखक का नाम मिटा उसपर करते कई नर्तन जैसा है वैसा नहीं दिखते कैसे लोगों का यह जमाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना
अधिकांश पोस्ट लगती वासना की कुंठा वर्जनाएं बस सेक्स ही है जीवन जीव सेक्स में हैं भरमाए प्यार सहज सेक्स उपज हर हृदय का है ताना-बाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना।
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