भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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शनिवार, 2 मई 2026
वेदनाएं
छूकर कह रही हैं यह आपकी चेतनाएं हंसिए, खिलखिलाईए घटेंगी न वेदनाएं
शब्दों में सिमटकर मनोभाव चल पड़े अर्थों में बिखरकर सद्भाव निकल पड़े क्या हुआ, कैसे हुआ यह समझ न पाएं हंसिए, खिलखिलाईए घटेगी न वेदनाएं
चौरंगी मन में चतुर्भज है कंपित चेतना मन आपका न छू लूँ संशय हो तो देखना संपर्क में होती हैं निर्मित अचानक कामनाएं हंसिए,खिलखिलाईये घटेगी न वेदनाएं
कब हो सका चलती रहे अपनी मनमर्जियाँ दूसरी आफत प्रणय की आती रहती अर्जियां छोड़िए जग की बातें क्या है सोच तो बताएं हंसिए, खिलखिलाईए घटेगी न वेदनाएं।
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