Nijatata काव्य

बुधवार, 6 मई 2026

विवाह

कुछ भावना कुछ सामाजिक चलन प्रवाह
बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह

जो कहते खुशियों भरी है वैवाहिक जिंदगी
वह डरते यह कहने में झेले हैं जो शर्मिंदगी
आरम्भ गर्मजोशी से फिर अदृश्य सोई दाह
बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह

सामाजिक बंधनों का है दबाव प्रखर जोड़
दिखावा प्रदर्शन खूब भीतर रोज रिश्ते तोड़
एक-दूजे से उदासीनता निकलती मुई आह
बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह

जो खींच रहे बलभर वह हैं साथ चलन क्रम
हर मोड़ पर उभरता है शंका लिए नया भ्रम
विवाहेत्तर संबंधों में हैं अभी भी छुईमुई पनाह
बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह।

धीरेन्द्र सिंह
06.04.2026
14.05


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