भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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बुधवार, 6 मई 2026
विवाह
कुछ भावना कुछ सामाजिक चलन प्रवाह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह
जो कहते खुशियों भरी है वैवाहिक जिंदगी वह डरते यह कहने में झेले हैं जो शर्मिंदगी आरम्भ गर्मजोशी से फिर अदृश्य सोई दाह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह
सामाजिक बंधनों का है दबाव प्रखर जोड़ दिखावा प्रदर्शन खूब भीतर रोज रिश्ते तोड़ एक-दूजे से उदासीनता निकलती मुई आह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह
जो खींच रहे बलभर वह हैं साथ चलन क्रम हर मोड़ पर उभरता है शंका लिए नया भ्रम विवाहेत्तर संबंधों में हैं अभी भी छुईमुई पनाह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह।
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