भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
आप कई आवरण के प्रकरण परे हैं विद्यमान थाप जिंदगी के कई आवरण धरे हैं निदान मति-मति, दौड़े-दौड़े, आस-आस, हँसमुख लखि-लखि, तीरे-तीरे, सांस-सांस सचमुच
यथार्थ के विचार में आपका ही नित संचार परमार्थ है स्वीकार जाप का ही मीत प्रकार रचि-रचि, हौले-हौले, खास-खास, अभिमुख लखि-लखि, हौले-हौले, सांस-सांस सचमुच
क्रिया की प्रतिक्रिया में सक्रिय है भाव क्रिया दिया है मन में जला विनयी है चाह प्रिया सखि-सखि, तौले-मोले, रास-रास गुपचुप लखि-लखि, हौले-हौले, सांस-सांस सचमुच।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में मंगलवार 05 मई, 2026
जवाब देंहटाएंको लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!