भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
▼
रविवार, 26 अप्रैल 2026
प्रबुद्ध
प्रबुद्ध हैं तो सर्वत्र ज्ञान बांटिए निबद्ध हैं तो यत्र-तंत्र संज्ञान बांटिए
संज्ञान उत्तर प्रदेश गृहित शब्द है विकासशील राज्य का जनित प्रारब्ध है धर्म और राजनीति यहां जांचिए निबद्ध हैं तो यत्र-तत्र संज्ञान बांटिए
थार के गुबार में लिप्त लगता व्यवहार संशय में उबरता सूर्यरश्मि सा त्यौहार विस्थापन यहां विवशता कागज पर नापिए निबद्ध हैं तो यत्र-तत्र संज्ञान बांटिए
इतर राज्य-राष्ट्र में दीप्तिमान हैं रहिवासी नोएडा, लखनऊ, अयोध्या आदि काशी संज्ञान विज्ञान है तबियत से तो झांकिए निबद्ध हैंबतो यत्र-तत्र संज्ञान बांटिए।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें