Nijatata काव्य

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

गर्मी

 मौसम आक्रामक नहीं कहीं है नर्मी
सुना है गर्म गुम्बद है उफन रही गर्मी



घर से बाहर सूर्य प्रखरता से मिलता है
पसीने में मजदूर निडरता से चलता है
धरा की उष्णता गुम्बद में फंसी चर्खी
सुना है गर्म गुम्बद है उफन रही गर्मी

आग बरस रही श्रमिक को लगे है फाग
तरबतर पसीने से भींगा सजाता है आज
हमेशा मौसम न रहा जिजीविषा धर्मी
सुना है गर्म गुम्बद है उफन रही गर्मी

सतत संघर्ष में निहित मानवता का उत्कर्ष
जूझते जीवन से उन्हें क्या मौसम का विमर्श
मौसम प्रणय करता कभी चुहल बेशर्मी
सुना है गर्म गुम्बद है उफन रही गर्मी।

धीरेन्द्र सिंह
28.04.2026
08.45

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