भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
▼
शनिवार, 16 मई 2026
बुधवार, 13 मई 2026
मंगलवार, 12 मई 2026
शनिवार, 9 मई 2026