भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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मंगलवार, 12 मई 2026
लेखन
देश, धर्म, संस्कृति पर रचना लिखिए एक समूह जागरूक का अनुरोध था पढ़कर अनुरोध चिंतन उसपर किया रामायण, श्रीमदभगवतगीता की कथा
राष्ट्र की विभिन्न परम्पराएं हैं अनमोल जो विगत इतिहास नहीं एक दर्पण था सत्य के तथ्य को कथ्य में पिरोया गया धूल में अटा दर्पण रह-रह चमक व्यथा
नींव सशक्त है निर्माण नया तो कीजिए देश, धर्म, संस्कृति सांस में है सबके मथा राम सा चरित्र कहां कृष्ण सी कहां कूटनीति पीढ़ी के संचित मार्गदर्शन क्या मात्र कथा
लेखन कौशल है तो कलम योद्धा बन जाईए समाज वही जीवित वर्तमान जिसने है मथा नए अस्त्र-शस्त्र हैं नई हैं कई युद्धनीतियाँ शौर्य-शक्ति जीवंत मात्र संयुक्त हों सखी-सखा
मेरा लेखन एक प्रहार है नहीं कोई चित्रहार भावनाओं का जैविक युद्ध आज से है नधा आपके सुझाव का आदर है प्रेरणा हैं दिए भाषा का मूल योद्धा हूँ देश, संस्कृति में रचा।
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