शब्द चुपके आ पहुंचा भावनाओं का बन संवाहक
आप संशय में हैं उलझे समस्या यह उत्पन्न नाहक
बदलती है प्रीत रीत कल्पनाओं से परे अकस्मात
जैसे तपती दोपहरी में हो रिमझीम सावन बरसात।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।