भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
कुछ भावना कुछ सामाजिक चलन प्रवाह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह
जो कहते खुशियों भरी है वैवाहिक जिंदगी वह डरते यह कहने में झेले हैं जो शर्मिंदगी आरम्भ गर्मजोशी से फिर अदृश्य सोई दाह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह
सामाजिक बंधनों का है दबाव प्रखर जोड़ दिखावा प्रदर्शन खूब भीतर रोज रिश्ते तोड़ एक-दूजे से उदासीनता निकलती मुई आह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह
जो खींच रहे बलभर वह हैं साथ चलन क्रम हर मोड़ पर उभरता है शंका लिए नया भ्रम विवाहेत्तर संबंधों में हैं अभी भी छुईमुई पनाह बदल रहा है रूप सफल नहीं कोई विवाह।
दिखती कम मौलिकता नकल का है ताना-बाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना
हर सामान्य पोस्ट में दिखे यौवन की ही लयकारी यौवन कहां है न दिखता लगे यथार्थ से है पर्देदारी चापलूसी उथले मजाक से संभव है क्या जीत जाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना
कॉपी-पेस्ट का बढ़ते चलन में पोस्ट का पुनरावर्तन मौलिक लेखक का नाम मिटा उसपर करते कई नर्तन जैसा है वैसा नहीं दिखते कैसे लोगों का यह जमाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना
अधिकांश पोस्ट लगती वासना की कुंठा वर्जनाएं बस सेक्स ही है जीवन जीव सेक्स में हैं भरमाए प्यार सहज सेक्स उपज हर हृदय का है ताना-बाना एक ने जो मूल गाया उसको ही गाना-गुनगुनाना।