भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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शुक्रवार, 3 जुलाई 2026
उपवन मौन है
डंठलों को पूछता कौन है उपवन यहां पर भी मौन है
पुष्प का अपार भार है संभाले कंटकों की धार को भी सँवारे सुगंध चहुँओर तरंग आध पौन है उपवन यहां पर भी मौन है
बागबानी में डंठलों को दाना-पानी पुष्प और कंटक की है जिंदगानी कैंची कटा पुष्पडंठल सम्मान छौन है उपवन यहां पर भी मौन है
है न कराहता ना उन्माद दहाड़ता मौसमी प्रहार को मौन पछाड़ता डंठल अनदेखे से सपनों का गौन है उपवन यहां पर भी मौन है।
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