भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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गुरुवार, 30 अप्रैल 2026
मजदूर दिवस
मजदूर दिवस है ना होइए मगरूर भारत है निर्माता विभिन्न्न से मजदूर
पसीना बहानेवाले ही लगते हैं श्रमिक पढ़े-लिखे भी मजदूर कर मौलिकता शमित भारत श्रमिकों का निर्यातक है मशहूर भारत है निर्माता विभिन्न से मजदूर
आई टी का बोलबाला सब पढ़ते प्रौद्योगिकी पूर्ण कर यह शिक्षा सेवा प्रदाता की लायिकी कम्प्यूटर की गैर भाषा न अपना सर्च इंजन नूर भारत है निर्माता विभिन्न से मजदूर
हम विश्व के श्रेष्ठ एक शिक्षित मजदूर मजदूर दिवस आज भी रहा हमें घूर बहुसंख्य विदेशों में हैं जाने को प्रणपूर भारत है निर्माता विभिन्न से मजदूर।
सही कहा है
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