Nijatata काव्य

▼

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

ईश्वर

प्यार की आराधना किए नहीं ईश्वरीय भक्ति में निमग्न
मानवता में ईश्वर मिला नहीं देखादेखी में हैं कई मग्न



धर्म भी जलवायु अनुसार है निधारित जीवन शैली
कहीं की परम्परा मीठी लगे कहीं की लगे है कसैली
अपनी-अपनी परंपराओं के ज्ञानी-ध्यानी कई संलग्न
मानवता में ईश्वर मिला नहीं देखदेखी में हैं कई मग्न

बिन भाषा शब्दार्थ समझे नित घंटों करें उसका उवाच
जीवन मनुष्य को तथ्य दर्शाता पर मानते नहीं उसे साँच
लौकिकता में भी ईश्वर परालौकिक कथ्य मिले भग्न
मानवता में ईश्वर मिला नहीं देखदेखी में हैं कई मग्न

आधुनिकता में प्रकृति दूर भौतिकता के लिए हैं गरूर
पूजापाठ जितना अधिक उतने कष्ट जीवन के हों दूर
जीवन ईश्वर प्यार भक्ति है चाह समर्पण से व्यक्ति संलग्न
मानवता में ईश्वर मिला नहीं देखदेखी में हैं कई मग्न।

धीरेन्द्र सिंह
22.10.2026
15.41

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें