Nijatata काव्य

▼

रविवार, 18 अक्टूबर 2026

यह कैसा प्रमाणपत्र ?

यह कैसा प्रमाणपत्र ?


प्रमाणपत्र

विद्यार्थियों को 

उनकी योग्यता को

प्रमाणित कर विद्यालय द्वारा

दिया जाता है

पर

कुछ हिंदी समूह भी

प्रमाणपत्र बांट रहे

ना जाने किस योग्यता से

जांच रहे;


कौन हैं 

ऐसे प्रमाणपत्र देनेवाले,

क्या मानक हैं ?

किसी को

कुछ नहीं मालूम

बस

प्रमाणपत्र बंट रहे नियमित,


यह और कुछ नहीं

समूह विशेष का

विपणन है

और समूह के 

कुछ प्रमुख का

स्व-विज्ञापन,

व्यक्ति की

श्रेष्ठता साबित करना

हिंदी जगत का

लाइलाज रोग है,


यदि इस रुग्ण प्रथा को

बंद नहीं किया जा सकता

तो वंचित रखें

मेरी रचनाओं को

प्रमाणपत्र के अनावश्यक बोझ से,

रचना वह होती हैव

जो प्रशंसा, समीक्षा, टिप्पणी की

अभिलाषी तो है पर

किसी भी स्तर के 

प्रमाणपत्र की निर्मोही है।


धीरेन्द्र सिंह

18.10.2026

19.52

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें