भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
मनुष्य
रोपता नहीं हूँ बल्कि छींटता हूँ ढकेलता नहीं बल्कि खींचता हूँ पल्लवन संभावना जहां भी दिखे मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ
सुंदर सृजन
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