Nijatata काव्य

शनिवार, 25 जुलाई 2026

त्रिभुजी पत्रकार

त्रिभुज का अपना विशेष महत्व है जो दर्शाता है कि जिस को से भी देखी जाए उर्ध्वगामी ही दिखती है। पत्रकार यदि त्रिभुजी रूप में कार्यरत रहते हैं तो वह सामाजिक चेतना को विभिन्न आयाम देते हैं जिससे समाज यथोचित प्रगति, सहमति और प्रदर्शन कर पाता है। त्रिभुज का एक दूसरा रूप भी है जिसमें पंख पसारे व्योम को चूमने या लक्ष्य को भेदने की अभिलाषा नजर आती है। डॉ अरविंद सिंह को मैंने हमेशा त्रिभुजी के रूप में ही पाया है। त्रिभुजी पत्रकार के प्रमुख तीन अंग होते हैं सत्य के संग, सामान्य जनता की ओर तथा नएपन की उपलब्ध संसाधनों में पहचान। 

त्रिभुजी पत्रकार डॉ अरविंद सिंह अपने पत्रकारिता जीवन में सत्य का साथ पकड़कर समय-समय पर सत्य का साथ दिया। पत्रकारिता में सत्य को दस्तावेजी रूप देने के लिए इन्होंने "सामयिक ब्लिट्ज" नामक साप्ताहिकी का प्रकाशन वाराणसी से आरम्भ किया। यहां त्रिभुजी पत्रकारिता का एक पक्ष "सत्य" प्रमाणित हो रहा है। दूसरा पक्ष है सामान्य जनता की ओर बढ़ना। यहां सामान्य जनता की विभिन्न परिभाषाएं हो सकती हैं किंतु यदि वाराणासी को ध्यान में रखकर सामान्य जनता की पहचान की जाए तो ग्रामीण जनों का पक्ष प्रमुख रहेगा। इस पक्ष को प्रमाणित करता है त्रिभुजी पत्रकार डॉ अरविंद सिंह का नियमित अपने साप्ताहिकी "सामयिक ब्लिट्ज" को निःशुल्क कुछ गांव को उपलब्ध कराना। प्रसंगवश उल्लेख किया जा रहा है कि ग्रामीण साप्ताहिकी की प्रतीक्षा उत्सुकतापूर्वक करते हैं। उपलब्ध संसाधनों में नएपन का प्रमाण इस त्रिभुजी पत्रकार के वाराणसी में आयोजित विभिन्न कार्यक्रम तथा अनेक मंदिर निर्माण, गरीबोंनको भोजन एवं कंबल आदि वितरण से जुड़ा है।

वाराणसी के स्पंदनों को जितनी कुशलता से इस त्रिभुजी पत्रकार ने अपनी पुस्तकों में समेटा है ऐसा उदाहरण वर्तमान में कहीं देखने को नहीं मिल रहा है। प्रत्येक अच्छे और बड़े काम में एक धुन होती है लय होती है जिसके आधार पर कार्यों में लयबद्धता बनी रहती है। यदि इन त्रिभुजी पत्रकार महोदय की धुन की बात करें तो वह हैं वाराणसी के सांसद  और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तथा लय है विशेषकर वाराणसी के समग्र विकास गति। पिछले कुछ वर्षों से लगातार पुस्तकों का प्रकाशन वाराणसी के पल-पल, छिन-छिन का पारदर्शी दस्तावेज सा है। यह पुस्तक पत्रकार की डायरी की त्रिभुजी पत्रकार डॉ अरविंद सिंह के काशी के प्रति समर्पण और अनुराग को दर्शाता है। यह पुस्तक भी एक पारदर्शी दस्तावेज की तरह है। 

धीरेन्द्र सिंह

कवि और ब्लॉगर

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