Nijatata काव्य

बुधवार, 24 जून 2026

लाठी-लाठी का भेद

उन्मुक्त कामनाओं का कैसे करें उल्लेख
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती हैं खेद



अपने मन की सुनें या समाज को गुनें


उभरती हैं दबती जाती हैं आह्लादित धुनें
परिवेश ही सुन धुन निकालता मीनमेख
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती हैं खेद

जब मन उड़ता, चाहे जिस ओर है मुड़ता
मात्र उन्माद नहीं रहता बल्कि भाव गूढता
कदम आगे-पीछे होते देख अनगढ़ विभेद
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती है खेद

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, गया सिखाया
सामाजिकता के कई स्तर हैं, गया छुपाया
अर्थ आधारित है जीवन लाठी-लाठी का भेद
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती हैं खेद।

धीरेन्द्र सिंह
25.06.2026
04.23

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