भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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शुक्रवार, 22 मई 2026
बरकत अरोड़ा
बरकत अरोड़ा एक नन्हीं परी न जाने कहाँ से है वह नृत्य भरी
रात्रि के 0.44 पर लेखन चल पल घड़ी प्रतिभा रोमांचित की वरना मुझे क्या पड़ी
बालिका ईश्वर प्रदत्त गुण हाव-भाव समाए खड़ी संगीत बजे पैर चले थम जाए सब घड़ी
अब और क्या लिखूं वह अद्भुत अनंत कड़ी कैसे निभाती वयस्क भाव वीडियो है एक कड़ी।
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