भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता
अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता
शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
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मंगलवार, 19 मई 2026
आपबीती
आपबीती इस कदर है खुद को नहीं खबर है बीत गया दौर वह भी मन मचाता भी ग़दर है
जो सोचा ना मिला वह जो मिला किसकी नजर है कर्म अब तक लड़ रहा भाग्य ही असली डगर है
स्वयं खंडित पर है मंडित स्तंभित पूरा शहर है है बहादुर जाए कहां दूर कष्टमय लगता सफर है
जी रहे हैं लोग ऐसे जीवन का ऐसा असर है चाह कुछ होती नहीं है जीता वही जिसमें सबर है।
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