Nijatata काव्य

मंगलवार, 13 जनवरी 2026

कूद-फांद

कूद-फांद कर निनाद

जाने कौन छुपा मांद


समय बदल रहा क्या

अभय मचल रहा क्या

पिघल रहा अब विषाद

जाने कौन छुपा मांद


शब्द हैं कालिख पुते

भाव घृणा को जपे

असुरा गूंजे है निनाद

जाने कौन छुपा मांद


शब्दभेदी क्या चले बाण

एकलव्य हैं कई निष्णात

तड़पन बने धड़कन संवाद

जाने कौन छुपा मांद।


धीरेन्द्र सिंह

14.01.2026

06.18




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