Nijatata काव्य

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रविवार, 17 नवंबर 2024

सर्दी

 सर्दियों की दस्तक है

गर्माहट ही समीक्षक है

मौसम के कई प्रश्नपत्र

सिहरन बनी अधीक्षक है


सर्द हवाएं त्वचा बेचैन

गर्म वस्त्र लकदक हैं

दिन पीछे आगे रात

रसोई भी भौंचक है


गर्म चुस्कियां विधा अनेक

नर्म गर्म ही रक्षक है

धुंध, कुहासे दूध बताशे

वाहन लाइट कचकच है


चेहरा अधर क्रीम भरा

भूख लगे भक्षक है

श्रृंगार की धार फुहार

अधर-अधर अक्षत है।


धीरेन्द्र सिंह

17.11.2024

20.11


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