निज़ता

भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।

गुरुवार, 21 अगस्त 2025

छनाछन

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 भूल जाइए तन मात्र रहे जागृत मन प्रतिध्वनि तब उभरेगी छन छनाछन काया की माया में है धूप कहीं छाया मन से जो जीता वह जग जीत पाया आत्मचेतना है सु...
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सलवटें

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सलवटें नहीं होती सिर्फ बिछी चादर में व्यक्तित्व भी होता है भरा असंख्य सलवटों से कुछ चीन्हे कुछ अनचीन्हे, नित हटाई जाती है सलवटें चादर की पर ...
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मंगलवार, 19 अगस्त 2025

मुम्बई वर्षा

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 मुम्बई में  हो रही चार दिनों से लगातार बरसात और मीडिया बोल रहा मुम्बई जल से परेशान, मीडिया यह नहीं बता रहा है कि कुलाबा से महालक्ष्मी मंदिर...
सोमवार, 18 अगस्त 2025

बरसात

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 बहत्तर घंटे से लगातार बरसात भोर नींद खुली भय के हालात लग रहा बादल फटा क्रोध जता बारिश की गर्जना मौन रतजगा भोर पांच तीस पर दूध का साथ भोर नी...
रविवार, 17 अगस्त 2025

प्रिए

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 तुम कहाँ हो लिए व्यथित हृदय कौन है अब धड़कन बना प्रिए तृषित अधर नमक चखें समर्थित बतलाओगी संख्या कितनी व्यथित अनुराग विस्फोटन को लिए दिए कौन ...

गज़ब

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 सुनो में एक हद हूँ और तुम बेहद बात इसमें यह भी मैं बेअदब हूँ और तुम संग अदब, है न गज़ब! हम में विरोधाभास पर मैं हताश और तुम आकाश बात इसमें य...

रिश्ते

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कुछ रिश्ते इतने रम जाते हैं कि न जाने कब मर जाते हैं झटके दर झटके भी है अदा रिश्ता है तो नोक-झोंक बदा कब अपने रिश्ते में भर जाते हैं कि न जा...
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धीरेन्द्र सिंह
हिंदी के आधुनिक रूप के विकास में कार्यरत जिसमें कार्यालय, विश्वविद्यालय, प्रौद्योगिकी में देवनागरी लिपि, ऑनलाइन हिंदी समूहों में प्रस्तुत हिंदी पोस्ट में विकास, हिंदी के साथ अंग्रेजी का पक्षधर, हिंदी की विभिन्न संस्थाओं द्वारा हिंदी विकास के प्रति विश्लेषण, हिंदी का एक प्रखर और निर्भीक वक्ता व रचनाकार।
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