भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
▼
रविवार, 7 जनवरी 2024
शनिवार, 6 जनवरी 2024
शुक्रवार, 5 जनवरी 2024