भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
Nijatata काव्य
मंगलवार, 24 मई 2022
अपहरण
नदिया
आघात
गुरुवार, 12 मई 2022
पर्देदारी
सत्य सजल नयन उपवन
भावों की अविरल शीतलता
हर सृष्टि रचे अपनी धुन में
जग अपनी रचे लखि नीरवता
शब्दों का क्षद्म उपयोग नहीं
संवाद प्रवाहित निर्मल सरिता
हर लहर फहर दिल तक धाए
अनकहे प्रवाहित सबल धरिता
पट खोल लिए रचि पर्देदारी
कुछ दरद चटक निज करिता
यह भी एक संवाद सुफल जग
एक भाव लिए जीवन चरिता।
धीरेन्द्र सिंह
बुधवार, 11 मई 2022
ढह रही वह
एक मेरी सर्जना विकसित अंझुरायी
भावनाएं अति चंचल कृति घबराई
लड़खड़ाहट में टकराहट की ही गूंज
फिर भी न जाने रहती है इतराई
रुक गयी है इसलिए ढह रही वह
भ्रमित लोगों की है थामे अंजुराई
एक टीला गुमसुम ताकता है राह
जीवंतता दमित निष्क्रियता में दुहाई
मनचलों का मनोरंजनीय टीम
मन के हर चलन की ऋतु छाई
कामनाओं की झंकार झूमे नित
सर्जना में निज अर्चना मन भाई।
धीरेन्द्र सिंह